सुतीर्थ नामक यह तीर्थ कैथल से लगभग 21 कि.मी. की दूरी पर सौंत्था ग्राम के उत्तर-पश्चिम में स्थित है। इस तीर्थ का वर्णन महाभारत में इस प्रकार है:
ततो गच्छेत् राजेन्द्र सुतीर्थकमनुत्तमम्।
तत्रसन्निहिता नित्यं देवतैः सह।।
तत्राभिषेकं कुर्वीत पितृदेवार्चने रतः।
अश्वमेधमवाप्नोति पितृलोकं च गच्छति।।
(महाभारत, वन पर्व 83/54-55)
अर्थात् हे राजेन्द्र! तत्पश्चात् सर्वश्रेष्ठ सुतीर्थ में जाना चाहिए जहाँ नित्य पितर एवं देवताओं का सान्निध्य रहता है। वहाँ जाकर पितरों एवं देवताओं की अर्चना एवं अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने वाले मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है एवं वह पितृ लोक को प्राप्त करता है।
तीर्थ सरोवर पर प्राचीन ईंटों से निर्मित एक घाट है जिसके निकट दो प्राचीन मन्दिर हैं जिनका नवीनीकरण किया गया है।

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