हव्य नामक यह तीर्थ कैथल से लगभग 22 कि.मी. दूर भाणा नामक ग्राम में स्थित है।
इस तीर्थ से सम्बन्धित जनश्रुति के अनुसार यहाँ सतयुग में ब्रह्मा ने एक यज्ञ का आयोजन किया था जिसमें समस्त देवी देवताओं को निमन्त्रित कर उन्हें भोजन करवाया था। वैसे भी हव्य शब्द का अर्थ आहुति में दिया जाने वाला पदार्थ है जिससे यही तथ्य स्पष्ट होता है कि इस तीर्थ में किसी समय अवश्य ही किसी विशाल यज्ञ का आयोजन किया गया होगा।
इस तीर्थ के विषय में एक साधारण मान्यता यह भी पाई जाती है कि पाण्डवों ने कुछ समय के लिए इस तीर्थ पर निवास किया था। जनसाधारण में यह विश्वास पाया जाता है कि इस तीर्थ पर स्नान करने से पुण्यफल प्राप्त होता है। यहाँ सूर्य ग्रहण व चन्द्र ग्रहण के अवसर पर मेला लगता है। तीर्थ स्थित मन्दिर की भीतरी छत पर वानस्पतिक अलंकरण किया गया है।

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