देवी तीर्थ मोहना नामक यह तीर्थ कैथल से 17 कि.मी. दूर मोहना नामक ग्राम में स्थित है। महाभारत में कुरुक्षेत्र भूमि में देवी से सम्बन्धित प्रमुखतया तीन तीर्थ बताए गए हैं। पहला देवी तीर्थ शंखिनी के भीतर, दूसरा मध्ुावटी (मधुवन) के अन्तर्गत तथा तीसरा मृगधूम के अनन्तर है। यद्यपि ये तीनों तीर्थ देवी तीर्थ के ही पर्याय हैं तथापि इनके सेवन का पुण्य फल भिन्न-भिन्न है।
ग्राम मोहना में स्थित मधुवटी तीर्थ जो कि वस्तुतः देवी तीर्थ का ही पर्याय है इसका वर्णन महाभारत, वामन पुराण तथा ब्रह्म पुराण में उपलब्ध होता है। ब्रह्म पुराण में इसे मधुवट कहा गया है।
पाणिखातं मिश्रकंच मधुवटमनोजवौ।
(ब्रह्म पुराण 25/42)
महाभारत वन पर्व में इस तीर्थ का महत्व इस प्रकार वर्णित है।
गत्वा मधुवटीं चैव देव्यास्तीर्थे नरः शुचि:।
तत्र स्नात्वाऽर्चयित्वा च पितृन देवांश्च पुरुषः।
स देव्यासमनुज्ञातो गोसहस्रफलं लभेत्।
(महाभारत, वन पर्व 83/94-95)
अर्थात् जो मनुष्य पवित्र हृदय से मधुवटी के देवी तीर्थ में जाकर वहाँ स्नान करके देवताओं एवं पितरों की पूजा अर्चना करता है, देवी की कृपा से उसे सहस्र गऊओं के दान का पुण्य फल प्राप्त होता है।
वामन पुराण के अनुसार इस तीर्थ का महत्त्व महाभारत में वर्णित महत्त्व से भिन्न है:
गत्वा मधुवटीं चैव देव्यास्तीर्थं नरः शुचि।
तत्र स्नात्वाऽर्चयेद् देवान् पितृंश्च प्रयतो नरः।
स देव्या समानुज्ञाता यथा सिद्धिं लभेन्नरः।
(वामन पुराण 36/55-56)
अर्थात् पवित्र हृदय से मनुष्य को देवी के मधुवटी मंे जाकर वहां स्नान करके देवताओं एवं पितरों की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने वाला व्यक्ति देवी की कृपा से अभिलषित सिद्धि को प्राप्त कर लेता है।
यहाँ प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रविवार के दिन मेला लगता है।

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